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mahabharat 13.87.128-129: भृगु के सात पुत्र हुए, जो उन्हीं के समान गुणवान थे। च्यवन, वज्रशीर्ष, शुचि, और्व, शुक्र, वरेण्य और सवन - ये उन सातों के नाम हैं। सभी भृगुवंशी सामान्यतः वरुण कहलाते हैं। जिनके वंश में आप भी उत्पन्न हुए हैं। 128-129॥   |   mahabharat अध्याय 13.87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध  »  श्लोक 128-129
 
 
श्लोक  13.87.128-129 
भृगोस्तु पुत्रा: सप्तासन् सर्वे तुल्या भृगोर्गुणै:।
च्यवनो वज्रशीर्षश्च शुचिरौर्वस्तथैव च॥ १२८॥
शुक्रो वरेण्यश्च विभु: सवनश्चेति सप्त ते।
भार्गवा वारुणा: सर्वे येषां वंशे भवानपि॥ १२९॥
 
 
अनुवाद
भृगु के सात पुत्र हुए, जो उन्हीं के समान गुणवान थे। च्यवन, वज्रशीर्ष, शुचि, और्व, शुक्र, वरेण्य और सवन - ये उन सातों के नाम हैं। सभी भृगुवंशी सामान्यतः वरुण कहलाते हैं। जिनके वंश में आप भी उत्पन्न हुए हैं। 128-129॥
 
Bhrigu had seven sons, who were of the same quality as him. Chyavan, Vajrashirsha, Shuchi, Aurva, Shukra, Varenya, and Savan – these are the names of those seven. All Bhriguvanshis are generally called Varun. In whose lineage you are also born. 128-129॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)