Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.87.122-123h: हे प्रभु! हम सब लोग तथा समस्त जगत्, जिसमें सभी सजीव तथा निर्जीव सभी शामिल हैं, आपकी ही संतान हैं। अतः अब यह तेजस्वी अग्नि तथा वरुणरूप भगवान महादेव भी अपना-अपना मनोवांछित फल प्राप्त करें।॥122 1/2॥ | mahabharat अध्याय 13.87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे प्रभु! हम सब लोग तथा समस्त जगत्, जिसमें सभी सजीव तथा निर्जीव सभी शामिल हैं, आपकी ही संतान हैं। अतः अब यह तेजस्वी अग्नि तथा वरुणरूप भगवान महादेव भी अपना-अपना मनोवांछित फल प्राप्त करें।॥122 1/2॥
‘Lord! All of us and the entire world, including living and non-living things, are your children. So, now this luminous fire and this Lord Mahadev in the form of Varuna, may also get their desired fruits.’॥ 122 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥