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mahabharat 13.87.121: जब यह विवाद उत्पन्न हुआ, तब सब देवता ब्रह्माजी के पास गए, हाथ जोड़कर, सिर झुकाकर उन्हें प्रणाम किया और बोले- ॥121॥   |   mahabharat अध्याय 13.87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध  »  श्लोक 121
 
 
श्लोक  13.87.121 
ततोऽब्रुवन् देवगणा: पितामहमुपेत्य वै।
कृताञ्जलिपुटा: सर्वे शिरोभिरभिवन्द्य च॥ १२१॥
 
 
अनुवाद
जब यह विवाद उत्पन्न हुआ, तब सब देवता ब्रह्माजी के पास गए, हाथ जोड़कर, सिर झुकाकर उन्हें प्रणाम किया और बोले- ॥121॥
 
When this dispute arose, all the gods went to Brahmaji, folded their hands, bowed their heads and saluted him and said - ॥121॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)