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mahabharat 13.87.11-12: उस सनातन संकल्प को काम कहते हैं। उस काम के कारण रुद्र का जो तेज फिसलकर अग्नि में गिर गया था, उसे अग्नि ने ग्रहण कर लिया है। वे उस महान तेज को द्वितीय अग्नि के समान गंगाजी में स्थापित करेंगे और उसे बालक रूप में उत्पन्न करेंगे। वह बालक देवताओं के शत्रुओं के संहार का कारण बनेगा।॥11-12॥   |   mahabharat अध्याय 13.87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध  »  श्लोक 11-12
 
 
श्लोक  13.87.11-12 
सनातनो हि संकल्प: काम इत्यभिधीयते।
रुद्रस्य तेज: प्रस्कन्नमग्नौ निपतितं च यत्॥ ११॥
तत्तेजोऽग्निर्महद्भूतं द्वितीयमिति पावकम्।
वधार्थं देवशत्रूणां गंगायां जनयिष्यति॥ १२॥
 
 
अनुवाद
उस सनातन संकल्प को काम कहते हैं। उस काम के कारण रुद्र का जो तेज फिसलकर अग्नि में गिर गया था, उसे अग्नि ने ग्रहण कर लिया है। वे उस महान तेज को द्वितीय अग्नि के समान गंगाजी में स्थापित करेंगे और उसे बालक रूप में उत्पन्न करेंगे। वह बालक देवताओं के शत्रुओं के संहार का कारण बनेगा।॥11-12॥
 
The eternal resolution is called Kaam. The radiance of Rudra which had fallen into the fire after slipping due to that Kaam has been taken by Agni. He will place that great radiance like the second Agni in Gangaji and will create it in the form of a child. That child will be the reason for killing the enemies of the gods.॥ 11-12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)