Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.87.102: उस त्रिगुण वीर्य से महाबली ब्रह्माजी ने चतुर्गुणित प्राणियों को जन्म दिया और उनके वीर्य के काम-भाग से संसार में स्वाभाविक प्रवृत्ति वाले जीव उत्पन्न हुए ॥102॥ | mahabharat अध्याय 13.87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत: स जनयामास भूतग्रामं च वीर्यवान्।
तस्य तत् तेजसस्तस्माज्जज्ञे लोकेषु तैजसम्॥ १०२॥
अनुवाद
उस त्रिगुण वीर्य से महाबली ब्रह्माजी ने चतुर्गुणित प्राणियों को जन्म दिया और उनके वीर्य के काम-भाग से संसार में स्वाभाविक प्रवृत्ति वाले जीव उत्पन्न हुए ॥102॥
Powerful Brahmaji gave birth to fourfold living beings from that triple semen. The sexual part of his semen gave rise to the mobile creatures having natural tendencies in the world. 102॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥