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mahabharat 13.86.9: दादाजी! सोना मिट्टी और गाय से ज़्यादा पवित्र और श्रेष्ठ क्यों है? इसे दक्षिणा के लिए सर्वश्रेष्ठ क्यों माना जाता है? मुझे यह बताइए।   |   mahabharat अध्याय 13.86: भीष्मजीका अपने पिता शान्तनुके हाथमें पिण्ड न देकर कुशपर देना, सुवर्णकी उत्पत्ति और उसके दानकी महिमाके सम्बन्धमें वसिष्ठ और परशुरामका संवाद, पार्वतीका देवताओंको शाप, तारकासुरसे डरे हुए देवताओंका ब्रह्माजीकी शरणमें जाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 86: भीष्मजीका अपने पिता शान्तनुके हाथमें पिण्ड न देकर कुशपर देना, सुवर्णकी उत्पत्ति और उसके दानकी महिमाके सम्बन्धमें वसिष्ठ और परशुरामका संवाद, पार्वतीका देवताओंको शाप, तारकासुरसे डरे हुए देवताओंका ब्रह्माजीकी शरणमें जाना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  13.86.9 
कस्माच्च पावनं श्रेष्ठं भूमेर्गोभ्यश्च काञ्चनम्।
परमं दक्षिणार्थे च तद् ब्रवीहि पितामह॥ ९॥
 
 
अनुवाद
दादाजी! सोना मिट्टी और गाय से ज़्यादा पवित्र और श्रेष्ठ क्यों है? इसे दक्षिणा के लिए सर्वश्रेष्ठ क्यों माना जाता है? मुझे यह बताइए।
 
Grandfather! Why is gold more sacred and superior than earth and cows? Why is it considered the best for dakshina? Tell me this.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)