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mahabharat 13.86.75: हे देवों! आज तुम सबने मिलकर मेरी सन्तान का नाश किया है; अतः तुम सबकी भी सन्तान नहीं होगी।'   |   mahabharat अध्याय 13.86: भीष्मजीका अपने पिता शान्तनुके हाथमें पिण्ड न देकर कुशपर देना, सुवर्णकी उत्पत्ति और उसके दानकी महिमाके सम्बन्धमें वसिष्ठ और परशुरामका संवाद, पार्वतीका देवताओंको शाप, तारकासुरसे डरे हुए देवताओंका ब्रह्माजीकी शरणमें जाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 86: भीष्मजीका अपने पिता शान्तनुके हाथमें पिण्ड न देकर कुशपर देना, सुवर्णकी उत्पत्ति और उसके दानकी महिमाके सम्बन्धमें वसिष्ठ और परशुरामका संवाद, पार्वतीका देवताओंको शाप, तारकासुरसे डरे हुए देवताओंका ब्रह्माजीकी शरणमें जाना  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  13.86.75 
प्रजोच्छेदो मम कृतो यस्माद् युष्माभिरद्य वै।
तस्मात् प्रजा व: खगमा: सर्वेषां न भविष्यति॥ ७५॥
 
 
अनुवाद
हे देवों! आज तुम सबने मिलकर मेरी सन्तान का नाश किया है; अतः तुम सबकी भी सन्तान नहीं होगी।'
 
O celestial deities! Today all of you together have destroyed my progeny; therefore all of you too will not have any progeny.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)