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mahabharat 13.86.74: ‘देवताओं! मेरे पति मुझसे सन्तान उत्पन्न करना चाहते थे, परन्तु आप लोगों ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया; इसलिए आप सभी देवता सन्तानहीन हो जाएँगे।   |   mahabharat अध्याय 13.86: भीष्मजीका अपने पिता शान्तनुके हाथमें पिण्ड न देकर कुशपर देना, सुवर्णकी उत्पत्ति और उसके दानकी महिमाके सम्बन्धमें वसिष्ठ और परशुरामका संवाद, पार्वतीका देवताओंको शाप, तारकासुरसे डरे हुए देवताओंका ब्रह्माजीकी शरणमें जाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 86: भीष्मजीका अपने पिता शान्तनुके हाथमें पिण्ड न देकर कुशपर देना, सुवर्णकी उत्पत्ति और उसके दानकी महिमाके सम्बन्धमें वसिष्ठ और परशुरामका संवाद, पार्वतीका देवताओंको शाप, तारकासुरसे डरे हुए देवताओंका ब्रह्माजीकी शरणमें जाना  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  13.86.74 
यस्मादपत्यकामो वै भर्ता मे विनिवर्तित:।
तस्मात् सर्वे सुरा यूयमनपत्या भविष्यथ॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
‘देवताओं! मेरे पति मुझसे सन्तान उत्पन्न करना चाहते थे, परन्तु आप लोगों ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया; इसलिए आप सभी देवता सन्तानहीन हो जाएँगे।
 
‘Gods! My husband wanted to have children with me, but you people stopped him from doing this; therefore all of you gods will become childless.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)