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mahabharat 13.86.62: उस समय सभी देवता व्याकुल हो गए और कैलाश पर्वत पर विराजमान महान देवता रुद्र और वरदायिनी देवी उमा के पास गए।   |   mahabharat अध्याय 13.86: भीष्मजीका अपने पिता शान्तनुके हाथमें पिण्ड न देकर कुशपर देना, सुवर्णकी उत्पत्ति और उसके दानकी महिमाके सम्बन्धमें वसिष्ठ और परशुरामका संवाद, पार्वतीका देवताओंको शाप, तारकासुरसे डरे हुए देवताओंका ब्रह्माजीकी शरणमें जाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 86: भीष्मजीका अपने पिता शान्तनुके हाथमें पिण्ड न देकर कुशपर देना, सुवर्णकी उत्पत्ति और उसके दानकी महिमाके सम्बन्धमें वसिष्ठ और परशुरामका संवाद, पार्वतीका देवताओंको शाप, तारकासुरसे डरे हुए देवताओंका ब्रह्माजीकी शरणमें जाना  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  13.86.62 
तत: सर्वे समुद्विग्ना देवा रुद्रमुपागमन्।
ते महादेवमासीनं देवीं च वरदामुमाम्॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
उस समय सभी देवता व्याकुल हो गए और कैलाश पर्वत पर विराजमान महान देवता रुद्र और वरदायिनी देवी उमा के पास गए।
 
At that time all the gods became agitated and went to the great god Rudra and the boon-giving goddess Uma who were sitting on the peak of Kailash.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)