Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.86.37: परशुराम! वेदों की प्रामाणिकता को ध्यान में रखते हुए आप ब्राह्मणों का स्वागत करें और पुनः ब्रह्मर्षियों के समुदाय से इस पवित्र वस्तु के विषय में पूछें॥37॥ | mahabharat अध्याय 13.86: भीष्मजीका अपने पिता शान्तनुके हाथमें पिण्ड न देकर कुशपर देना, सुवर्णकी उत्पत्ति और उसके दानकी महिमाके सम्बन्धमें वसिष्ठ और परशुरामका संवाद, पार्वतीका देवताओंको शाप, तारकासुरसे डरे हुए देवताओंका ब्रह्माजीकी शरणमें जाना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राम विप्रा: सत्क्रियन्तां वेदप्रामाण्यदर्शनात्।
भूयश्च विप्रर्षिगणा: प्रष्टव्या: पावनं प्रति॥ ३७॥
अनुवाद
परशुराम! वेदों की प्रामाणिकता को ध्यान में रखते हुए आप ब्राह्मणों का स्वागत करें और पुनः ब्रह्मर्षियों के समुदाय से इस पवित्र वस्तु के विषय में पूछें॥37॥
Parashuram! Keeping in mind the authenticity of the Vedas, you should welcome the Brahmins and again ask the community of Brahmarishis about this sacred object. ॥ 37॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥