Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.86.22-23h: तत्पश्चात् पितरों ने स्वप्न में मुझे दर्शन देकर प्रसन्नतापूर्वक कहा - 'भरतश्रेष्ठ! हम तुम्हारे शास्त्रज्ञान से अत्यन्त प्रसन्न हैं; इसी के कारण तुम धर्म के विषयों में आसक्त नहीं हुए। | mahabharat अध्याय 13.86: भीष्मजीका अपने पिता शान्तनुके हाथमें पिण्ड न देकर कुशपर देना, सुवर्णकी उत्पत्ति और उसके दानकी महिमाके सम्बन्धमें वसिष्ठ और परशुरामका संवाद, पार्वतीका देवताओंको शाप, तारकासुरसे डरे हुए देवताओंका ब्रह्माजीकी शरणमें जाना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्पश्चात् पितरों ने स्वप्न में मुझे दर्शन देकर प्रसन्नतापूर्वक कहा - 'भरतश्रेष्ठ! हम तुम्हारे शास्त्रज्ञान से अत्यन्त प्रसन्न हैं; इसी के कारण तुम धर्म के विषयों में आसक्त नहीं हुए।
Thereafter, the ancestors appeared to me in a dream and said to me happily - 'Best of the Bharatas! We are very pleased with your knowledge of the scriptures; because of it you have not become attached to the subjects of religion.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥