Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.86.2: राज्य सदैव दुःखों से भरा रहता है। जिन लोगों ने अपने मन को वश में नहीं किया है, उनके लिए राज्य को सुरक्षित रखना बहुत कठिन होता है। इसीलिए राजाओं को प्रायः सौभाग्य की प्राप्ति नहीं होती॥ 2॥ | mahabharat अध्याय 13.86: भीष्मजीका अपने पिता शान्तनुके हाथमें पिण्ड न देकर कुशपर देना, सुवर्णकी उत्पत्ति और उसके दानकी महिमाके सम्बन्धमें वसिष्ठ और परशुरामका संवाद, पार्वतीका देवताओंको शाप, तारकासुरसे डरे हुए देवताओंका ब्रह्माजीकी शरणमें जाना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राज्यं हि सततं दु:खं दुर्धरं चाकृतात्मभि:।
भूयिष्ठं च नरेन्द्राणां विद्यते न शुभा गति:॥ २॥
अनुवाद
राज्य सदैव दुःखों से भरा रहता है। जिन लोगों ने अपने मन को वश में नहीं किया है, उनके लिए राज्य को सुरक्षित रखना बहुत कठिन होता है। इसीलिए राजाओं को प्रायः सौभाग्य की प्राप्ति नहीं होती॥ 2॥
A kingdom is always full of sorrow. It is very difficult for those who have not controlled their mind to keep the kingdom safe. That is why kings usually do not attain good fortune.॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥