Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.86.14: मैंने एकाग्र मन से शास्त्रानुसार पिण्डदान से पूर्व के सभी कार्य पूरे किए और विधिपूर्वक पिण्डदान देना आरम्भ किया॥14॥ | mahabharat अध्याय 13.86: भीष्मजीका अपने पिता शान्तनुके हाथमें पिण्ड न देकर कुशपर देना, सुवर्णकी उत्पत्ति और उसके दानकी महिमाके सम्बन्धमें वसिष्ठ और परशुरामका संवाद, पार्वतीका देवताओंको शाप, तारकासुरसे डरे हुए देवताओंका ब्रह्माजीकी शरणमें जाना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मैंने एकाग्र मन से शास्त्रानुसार पिण्डदान से पूर्व के सभी कार्य पूरे किए और विधिपूर्वक पिण्डदान देना आरम्भ किया॥14॥
With a concentrated mind, I completed all the tasks before offering Pind Daan as per the scriptures and started giving Pind Daan in the prescribed manner. 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥