| श्री महाभारत » पर्व 13: अनुशासन पर्व » अध्याय 85: ब्रह्माजीका इन्द्रसे गोलोक और गौओंका उत्कर्ष बताना और गौओंको वरदान देना » श्लोक 8-12 |
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| | | | श्लोक 13.85.8-12  | अथर्षय: सगन्धर्वा: किन्नरोरगराक्षसा:।
देवासुरसुपर्णाश्च प्रजानां पतयस्तथा॥ ८॥
पर्युपासन्त कौन्तेय कदाचिद् वै पितामहम्।
नारद: पर्वतश्चैव विश्वावसुर्हहाहुहू:॥ ९॥
दिव्यतानेषु गायन्त: पर्युपासन्त तं प्रभुम्।
तत्र दिव्यानि पुष्पाणि प्रावहत् पवनस्तदा॥ १०॥
आजह्रुर्ऋतवश्चापि सुगन्धीनि पृथक् पृथक्।
तस्मिन् देवसमावाये सर्वभूतसमागमे॥ ११॥
दिव्यवादित्रसंघुष्टे दिव्यस्त्रीचारणावृते।
इन्द्र: पप्रच्छ देवेशमभिवाद्य प्रणम्य च॥ १२॥ | | | | | | अनुवाद | | कुन्तीपुत्र! तत्पश्चात एक दिन जब ऋषि, गन्धर्व, किन्नर, नाग, दैत्य, देवता, दानव, गरुड़ और प्रजापति भगवान ब्रह्मा की सेवा में उपस्थित थे, जब नारद, पर्वत, विश्वावसु, हाहा और हूहू नामक गन्धर्व वहाँ दिव्य गान गाते हुए ब्रह्माजी की आराधना कर रहे थे, वायुदेव दिव्य पुष्पों की सुगन्धि लेकर बह रहे थे, भिन्न-भिन्न ऋतुएँ भी उत्तम सुगन्ध वाले दिव्य पुष्प प्रदान कर रही थीं, देवताओं का समाज एकत्रित था, समस्त प्राणी एकत्रित थे, दिव्य वाद्यों की मनोहर ध्वनि गूँज रही थी और दिव्य कन्याओं और भालों से वह समुदाय घिरा हुआ था, उसी समय देवराज इन्द्र ने भगवान ब्रह्मा को प्रणाम करके पूछा -॥8-12॥ | | | | Kunti's son! Thereafter one day when the sages, Gandharvas, Kinnars, serpents, demons, gods, demons, Garuda and Prajapatis were present in the service of Lord Brahma, when the Gandharvas named Narada, Parvat, Vishwavasu, Haha and Hoohoo were worshipping Lord Brahma there singing divine tunes, the wind god was blowing carrying the fragrance of divine flowers, the different seasons were also presenting divine flowers with excellent fragrance, the society of gods was gathered, all creatures were gathering, the beautiful sound of divine musical instruments was resounding and the community was surrounded by divine girls and bards, at that very time Devraj Indra bowed to Lord Brahma and asked -॥ 8-12॥ | | ✨ ai-generated | | |
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