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श्लोक 13.85.47  |
एतत् ते सर्वमाख्यातं पावनं च महाद्युते।
पवित्रं परमं चापि गवां माहात्म्यमुत्तमम्॥ ४७॥ |
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| अनुवाद |
| हे महात्मन! मैंने आपसे गौओं के परम पवित्र, परम पावन और परम उत्तम माहात्म्य के विषय में यह सब कहा है ॥ 47॥ |
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| O great one! I have told you all this about the most sacred, most holy and most excellent significance of cows. ॥ 47॥ |
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