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श्लोक 13.85.44-45  |
एतत् ते सर्वमाख्यातं मया शक्रानुपृच्छते॥ ४४॥
न ते परिभव: कार्यो गवामसुरसूदन॥ ४५॥ |
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| अनुवाद |
| असुरसूदन शक्र! इस प्रकार मैंने तुम्हारे प्रश्नानुसार सब कुछ कह दिया। अब तुम्हें कभी भी गौओं का अनादर नहीं करना चाहिए ॥44-45॥ |
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| Asurasudan Shakra! Thus I have told you everything as per your query. Now you should never disrespect cows. ॥ 44-45॥ |
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