श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 85: ब्रह्माजीका इन्द्रसे गोलोक और गौओंका उत्कर्ष बताना और गौओंको वरदान देना  »  श्लोक 44-45
 
 
श्लोक  13.85.44-45 
एतत् ते सर्वमाख्यातं मया शक्रानुपृच्छते॥ ४४॥
न ते परिभव: कार्यो गवामसुरसूदन॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
असुरसूदन शक्र! इस प्रकार मैंने तुम्हारे प्रश्नानुसार सब कुछ कह दिया। अब तुम्हें कभी भी गौओं का अनादर नहीं करना चाहिए ॥44-45॥
 
Asurasudan Shakra! Thus I have told you everything as per your query. Now you should never disrespect cows. ॥ 44-45॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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