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श्लोक 13.85.24-25h  |
सुरभ्य: पुण्यकर्मिण्य: पावना: शुभलक्षणा:।
यदर्थं गां गताश्चैव सुरभ्य: सुरसत्तम॥ २४॥
तच्च मे शृणु कात्स्न्र्येन वदतो बलसूदन। |
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| अनुवाद |
| सुरभि गौएँ पुण्य कर्म करने वाली और शुभ लक्षणों वाली हैं। हे देवश्रेष्ठ! बलसूदन! वे जिस उद्देश्य से पृथ्वी पर आई हैं, वह मैं तुम्हें विस्तारपूर्वक बताता हूँ। सुनो॥24 1/2॥ |
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| ‘Surabhi cows perform pious deeds and have auspicious signs. O best of the gods! Balasudan! I am telling you in detail the purpose for which they have gone to the earth. Listen.॥ 24 1/2॥ |
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