श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 85: ब्रह्माजीका इन्द्रसे गोलोक और गौओंका उत्कर्ष बताना और गौओंको वरदान देना  »  श्लोक 24-25h
 
 
श्लोक  13.85.24-25h 
सुरभ्य: पुण्यकर्मिण्य: पावना: शुभलक्षणा:।
यदर्थं गां गताश्चैव सुरभ्य: सुरसत्तम॥ २४॥
तच्च मे शृणु कात्‍स्‍न्‍‍‍र्येन वदतो बलसूदन।
 
 
अनुवाद
सुरभि गौएँ पुण्य कर्म करने वाली और शुभ लक्षणों वाली हैं। हे देवश्रेष्ठ! बलसूदन! वे जिस उद्देश्य से पृथ्वी पर आई हैं, वह मैं तुम्हें विस्तारपूर्वक बताता हूँ। सुनो॥24 1/2॥
 
‘Surabhi cows perform pious deeds and have auspicious signs. O best of the gods! Balasudan! I am telling you in detail the purpose for which they have gone to the earth. Listen.॥ 24 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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