श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 84: लक्ष्मी और गौओंका संवाद तथा लक्ष्मीकी प्रार्थनापर गौओंके द्वारा गोबर और गोमूत्रमें लक्ष्मीको निवासके लिये स्थान दिया जाना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  13.84.8 
मयाभिपन्ना: सिध्यन्ते ऋषयो देवतास्तथा।
यान् नाविशाम्यहं गावस्ते विनश्यन्ति सर्वश:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
देवता और ऋषिगण मेरी कृपा से ही सिद्धि प्राप्त करते हैं। हे गौओं! जिनके शरीर में मैं प्रवेश नहीं करता, वे सर्वथा नष्ट हो जाते हैं॥8॥
 
Gods and sages attain success only by being blessed by me. O cows! Those in whose bodies I do not enter, are completely destroyed. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)