श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 84: लक्ष्मी और गौओंका संवाद तथा लक्ष्मीकी प्रार्थनापर गौओंके द्वारा गोबर और गोमूत्रमें लक्ष्मीको निवासके लिये स्थान दिया जाना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  13.84.7 
मयाभिपन्ना देवाश्च मोदन्ते शाश्वती: समा:।
इन्द्रो विवस्वान् सोमश्च विष्णुरापोऽग्निरेव च॥ ७॥
 
 
अनुवाद
मेरे संरक्षण में रहने के कारण इन्द्र, सूर्य, चन्द्रमा, विष्णु, जल के अधिष्ठाता वरुण और अग्नि आदि देवता सदैव सुख भोगते रहते हैं॥7॥
 
Due to being under my protection, Indra, Surya, Chandra, Vishnu, the presiding deity of water Varuna and Agni etc. gods are always enjoying happiness. ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)