vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 13: अनुशासन पर्व
»
अध्याय 84: लक्ष्मी और गौओंका संवाद तथा लक्ष्मीकी प्रार्थनापर गौओंके द्वारा गोबर और गोमूत्रमें लक्ष्मीको निवासके लिये स्थान दिया जाना
»
श्लोक 3
श्लोक
13.84.3
श्री: कृत्वेह वपु: कान्तं गोमध्येषु विवेश ह।
गावोऽथ विस्मितास्तस्या दृष्ट्वा रूपस्य सम्पदम्॥ ३॥
अनुवाद
एक बार की बात है, देवी लक्ष्मी ने एक सुंदर रूप धारण किया और गायों के एक झुंड में प्रवेश किया। गायें उनकी सुंदरता और वैभव को देखकर चकित रह गईं।
Once upon a time, Goddess Lakshmi assumed a beautiful form and entered a herd of cows. The cows were astonished to see her beauty and splendor.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×