श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 84: लक्ष्मी और गौओंका संवाद तथा लक्ष्मीकी प्रार्थनापर गौओंके द्वारा गोबर और गोमूत्रमें लक्ष्मीको निवासके लिये स्थान दिया जाना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  13.84.18 
बहुना च किमुक्तेन गम्यतां यत्र वाञ्छसि।
वपुष्मन्त्यो वयं सर्वा: किमस्माकं त्वयानघे॥ १८॥
 
 
अनुवाद
इस विषय पर बहुत अधिक बोलने से क्या लाभ? तुम जहाँ चाहो वहाँ जा सकते हो। हे भोले! हम सबके शरीर तो स्वस्थ और सुन्दर हैं; फिर हमें तुमसे क्या लेना-देना?॥18॥
 
What is the use of talking too much on this subject? You can go wherever you want. You innocent ones! We all have healthy and beautiful bodies anyway; so what do we have to do with you?॥18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)