श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 84: लक्ष्मी और गौओंका संवाद तथा लक्ष्मीकी प्रार्थनापर गौओंके द्वारा गोबर और गोमूत्रमें लक्ष्मीको निवासके लिये स्थान दिया जाना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  13.84.17 
गाव ऊचु:
नावमन्यामहे देवि न त्वां परिभवामहे।
अध्रुवा चलचित्तासि ततस्त्वां वर्जयामहे॥ १७॥
 
 
अनुवाद
गौएँ बोलीं - देवी ! हम आपका अपमान या अनादर नहीं कर रहे हैं । हम तो केवल आपका परित्याग कर रहे हैं । वह भी इसलिए कि आपका मन चंचल है । आप कहीं भी स्थिर नहीं रहतीं ॥17॥
 
The cows said - Goddess! We are not insulting or disrespecting you. We are only abandoning you. That too because your mind is fickle. You do not remain stable anywhere.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)