श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 84: लक्ष्मी और गौओंका संवाद तथा लक्ष्मीकी प्रार्थनापर गौओंके द्वारा गोबर और गोमूत्रमें लक्ष्मीको निवासके लिये स्थान दिया जाना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  13.84.12 
वपुष्मन्त्यो वयं सर्वा: किमस्माकं त्वयाद्य वै।
यथेष्टं गम्यतां तत्र कृतकार्या वयं त्वया॥ १२॥
 
 
अनुवाद
हमारे शरीर तो अपने आप में स्वस्थ और सुन्दर हैं। हमें आपसे क्या लेना-देना? जहाँ आपकी इच्छा हो, वहाँ चले जाइए। आपने हमें दर्शन दिए और हम उसी से संतुष्ट हैं॥12॥
 
Our bodies are healthy and beautiful in themselves. What do we have to do with you? Go wherever you wish. You gave us darshan and we are satisfied with that.॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)