श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 83: गौओंका माहात्म्य तथा व्यासजीके द्वारा शुकदेवसे गौओंकी, गोलोककी और गोदानकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  13.83.22 
महार्हमणिपत्रैश्च काञ्चनप्रभकेसरै:।
नीलोत्पलविमिश्रैश्च सरोभिर्बहुपङ्कजै:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
वहाँ की भूमि अनेक सरोवरों से सुशोभित है। उन सरोवरों में कुमुदिनियों से मिश्रित अनेक नीले कमल खिलते रहते हैं। उन कमलों की पंखुड़ियाँ बहुमूल्य रत्नों से युक्त हैं और उनका केसर अपनी स्वर्णिम आभा से चमकता है॥ 22॥
 
The land there is adorned with many lakes. Many blue lotuses mixed with water lilies keep blooming in those lakes. The petals of those lotuses are full of precious gems and their saffron shines with its golden glow.॥ 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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