श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 83: गौओंका माहात्म्य तथा व्यासजीके द्वारा शुकदेवसे गौओंकी, गोलोककी और गोदानकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  13.83.19 
यत्र वृक्षा मधुफला दिव्यपुष्पफलोपगा:।
पुष्पाणि च सुगन्धीनि दिव्यानि द्विजसत्तम॥ १९॥
 
 
अनुवाद
द्विजश्रेष्ठ! गोलोक के सभी वृक्ष मधुर एवं स्वादिष्ट फल देते हैं। वे दिव्य फल-फूलों से युक्त हैं। उन वृक्षों के पुष्प दिव्य एवं सुखद गंध से युक्त हैं। 19॥
 
Dwijshreshtha! All the trees of Goloka bear sweet and tasty fruits. They are blessed with divine fruits and flowers. The flowers of those trees are full of divine and pleasant smell. 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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