Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.82.16: हे पुरुषश्रेष्ठ! मैंने तुम्हें गौओं के गुणों का वर्णन करने वाले साहित्य का केवल एक छोटा सा अंश ही सुनाया है। मैंने तो तुम्हें केवल मार्ग दिखाया है। इस संसार में गौदान से बढ़कर कोई दान नहीं है। उनके समान कोई दूसरा आश्रय नहीं है। ॥16॥ | mahabharat अध्याय 13.82: गौओं तथा गोदानकी महिमा । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गुणवचनसमुच्चयैकदेशो
नृवर मयैष गवां प्रकीर्तितस्ते।
न च परमिह दानमस्ति गोभ्यो
भवति न चापि परायणं तथान्यत्॥ १६॥
अनुवाद
हे पुरुषश्रेष्ठ! मैंने तुम्हें गौओं के गुणों का वर्णन करने वाले साहित्य का केवल एक छोटा सा अंश ही सुनाया है। मैंने तो तुम्हें केवल मार्ग दिखाया है। इस संसार में गौदान से बढ़कर कोई दान नहीं है। उनके समान कोई दूसरा आश्रय नहीं है। ॥16॥
O best of men! I have told you only a small part of the literature describing the qualities of cows. I have merely shown you the way. There is no greater gift in this world than the gift of cows. There is no other shelter like them. ॥16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥