| श्री महाभारत » पर्व 13: अनुशासन पर्व » अध्याय 82: गौओं तथा गोदानकी महिमा » श्लोक 15 |
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| | | | श्लोक 13.82.15  | यया सर्वमिदं व्याप्तं जगत् स्थावरजंगमम्।
तां धेनुं शिरसा वन्दे भूतभव्यस्य मातरम्॥ १५॥ | | | | | | अनुवाद | | जो सम्पूर्ण चराचर जगत् में व्याप्त है, भूत और भविष्य की माता है, उस गौ को मैं श्रद्धापूर्वक सिर झुकाता हूँ ॥15॥ | | | | I bow my head in reverence to the cow who pervades the entire animate and inanimate universe, the mother of the past and the future. ॥15॥ | | ✨ ai-generated | | |
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