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mahabharat 13.81.15: जो मनुष्य वायु के द्वारा उड़ाई गई धूल के समान रंग वाली गौ को वस्त्र से ढककर, बछड़े और कांसे के दूध के पात्र सहित दान करता है, वह वायु लोक में पूजित होता है ॥15॥   |   mahabharat अध्याय 13.81: गौओंको तपस्याद्वारा अभीष्ट वरकी प्राप्ति तथा उनके दानकी महिमा, विभिन्न प्रकारके गौओंके दानसे विभिन्न उत्तम लोकोंमें गमनका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 81: गौओंको तपस्याद्वारा अभीष्ट वरकी प्राप्ति तथा उनके दानकी महिमा, विभिन्न प्रकारके गौओंके दानसे विभिन्न उत्तम लोकोंमें गमनका कथन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  13.81.15 
वातरेणुसवर्णां तु सवत्सां कांस्यदोहनाम्।
प्रदाय वस्त्रसंवीतां वायुलोके महीयते॥ १५॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य वायु के द्वारा उड़ाई गई धूल के समान रंग वाली गौ को वस्त्र से ढककर, बछड़े और कांसे के दूध के पात्र सहित दान करता है, वह वायु लोक में पूजित होता है ॥15॥
 
He who donates a cow, whose colour is like the dust blown by the wind, after covering it with a cloth, along with a calf and a bronze milk pot, is worshipped in the Vayu world. ॥15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)