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mahabharat 13.80.6: गायें भूत और भविष्य हैं। गायें चिरस्थायी पोषण का कारण और लक्ष्मी का मूल हैं। गायों को जो कुछ भी दिया जाता है, उसका पुण्य कभी नष्ट नहीं होता ॥6॥   |   mahabharat अध्याय 13.80: वसिष्ठका सौदासको गोदानकी विधि एवं महिमा बताना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 80: वसिष्ठका सौदासको गोदानकी विधि एवं महिमा बताना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  13.80.6 
गावो भूतं च भव्यं च गाव: पुष्टि: सनातनी।
गावो लक्ष्म्यास्तथा मूलं गोषु दत्तं न नश्यति॥ ६॥
 
 
अनुवाद
गायें भूत और भविष्य हैं। गायें चिरस्थायी पोषण का कारण और लक्ष्मी का मूल हैं। गायों को जो कुछ भी दिया जाता है, उसका पुण्य कभी नष्ट नहीं होता ॥6॥
 
Cows are the past and the future. Cows are the cause of everlasting nourishment and the root of Lakshmi. Whatever is given to cows, its merits never get destroyed. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)