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mahabharat 13.8.21: यदि क्षत्रिय सौ वर्ष का हो और श्रेष्ठ ब्राह्मण दस वर्ष का हो, तो भी दोनों को एक दूसरे को पुत्र और पिता मानना ​​चाहिए। उनमें ब्राह्मण पिता और क्षत्रिय पुत्र भी होते हैं ॥21॥   |   mahabharat अध्याय 13.8: श्रेष्ठ ब्राह्मणोंकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 8: श्रेष्ठ ब्राह्मणोंकी महिमा  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  13.8.21 
क्षत्रिय: शतवर्षी च दशवर्षी द्विजोत्तम:।
पितापुत्रौ च विज्ञेयौ तयोर्हि ब्राह्मणो गुरु:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
यदि क्षत्रिय सौ वर्ष का हो और श्रेष्ठ ब्राह्मण दस वर्ष का हो, तो भी दोनों को एक दूसरे को पुत्र और पिता मानना ​​चाहिए। उनमें ब्राह्मण पिता और क्षत्रिय पुत्र भी होते हैं ॥21॥
 
Even if a Kshatriya is a hundred years old and a great Brahmin is ten years old, both of them should consider each other as a son and father. Among them is a Brahmin father and a Kshatriya son. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)