श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 79: कपिला गौओंकी उत्पत्ति और महिमाका वर्णन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  13.79.3 
वैशम्पायन उवाच
इत्युक्तो धर्मराजेन तदा शान्तनवो नृप:।
सम्यगाह गुणांस्तस्मै गोप्रदानस्य केवलान्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - राजन ! धर्मराज युधिष्ठिर की यह बात सुनकर उस समय शान्तनुनन्दन भीष्म ने गोदान सम्बन्धी गुणों का विधिपूर्वक वर्णन करना आरम्भ किया ॥3॥
 
Vaishampayanji says – King! On hearing this from Dharmaraja Yudhishthir, at that time Shantanunandan Bhishma started describing the qualities related to Godan in a proper manner. 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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