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mahabharat 13.78.8: इस प्रकार एक रात गायों के साथ रहकर, उनके समान व्रत रखकर तथा उनके साथ एकाकार होकर मनुष्य सभी पापों से तुरंत मुक्त हो जाता है।   |   mahabharat अध्याय 13.78: गोदानकी विधि, गौओंसे प्रार्थना, गौओंके निष्क्रय और गोदान करनेवाले नरेशोंके नाम   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 78: गोदानकी विधि, गौओंसे प्रार्थना, गौओंके निष्क्रय और गोदान करनेवाले नरेशोंके नाम  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  13.78.8 
स तामेकां निशां गोभि: समसख्य: समव्रत:।
ऐकात्म्यगमनात् सद्य: कलुषाद् विप्रमुच्यते॥ ८॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार एक रात गायों के साथ रहकर, उनके समान व्रत रखकर तथा उनके साथ एकाकार होकर मनुष्य सभी पापों से तुरंत मुक्त हो जाता है।
 
In this manner, by staying with the cows for one night and observing the fast like them and becoming one with them, a man is instantly freed from all sins.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)