श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 78: गोदानकी विधि, गौओंसे प्रार्थना, गौओंके निष्क्रय और गोदान करनेवाले नरेशोंके नाम  »  श्लोक 5-6
 
 
श्लोक  13.78.5-6 
द्विजातिमतिसत्कृत्य श्व: कालमभिवेद्य च।
गोदानार्थे प्रयुञ्जीत रोहिणीं नियतव्रत:॥ ५॥
आह्वानं च प्रयुञ्जीत समंगे बहुलेति च।
प्रविश्य च गवां मध्यमिमां श्रुतिमुदाहरेत्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
जो व्यक्ति गौदान करने वाला हो, उसे चाहिए कि वह नियमपूर्वक व्रत करे और ब्राह्मण को बुलाकर उसका सत्कार करके कहे, ‘कल प्रातःकाल मैं तुम्हें गौदान करूँगा।’ तत्पश्चात वह लाल रंग की (रोहिणी) गौ दान के लिए बुलाए और ग्वालों को ‘समंगे बहुले’ कहकर संबोधित करे। फिर गौओं के बीच में प्रवेश करके निम्नलिखित श्रुतिका का पाठ करे -॥5-6॥
 
The person who is going to donate a cow should observe the fast regularly and after calling a Brahmin and welcoming him well he should say, 'Tomorrow morning I will donate a cow to you.' Thereafter he should call for a red coloured (Rohini) cow for donation and should address the cowherds by saying 'Samange Bahule'. Then after entering among the cows he should recite the following Shrutika -॥ 5-6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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