श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 78: गोदानकी विधि, गौओंसे प्रार्थना, गौओंके निष्क्रय और गोदान करनेवाले नरेशोंके नाम  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  13.78.3 
सतामर्थे सम्यगुत्पादितो य:
स वै क्लृप्त: सम्यगाभ्य: प्रजाभ्य:।
तस्मात् पूर्वं ह्यादिकालप्रवृत्तं
गोदानार्थं शृणु राजन् विधिं मे॥ ३॥
 
 
अनुवाद
राजन! ऋषियों ने सत्पुरुषों के लिए जो विधि बताई है, वही इन लोगों के लिए भी सिद्ध है। अतः प्राचीन काल से प्रचलित गोदान की उत्तम विधि को मुझसे सुनो।
 
Rajan! The method which the sages have expediently revealed for the good men, has been well established for these people. Therefore, listen to me about the best method of Godan which has been prevalent since ancient times. 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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