| श्री महाभारत » पर्व 13: अनुशासन पर्व » अध्याय 78: गोदानकी विधि, गौओंसे प्रार्थना, गौओंके निष्क्रय और गोदान करनेवाले नरेशोंके नाम » श्लोक 22 |
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| | | | श्लोक 13.78.22  | न चाशिष्यायाव्रतायोपकुर्या-
न्नाश्रद्दधानाय न वक्रबुद्धये।
गुह्यो ह्ययं सर्वलोकस्य धर्मो
नेमं धर्मं यत्र तत्र प्रजल्पेत् ॥ २२॥ | | | | | | अनुवाद | | जो व्यक्ति शिष्य न हो, व्रत न करता हो, श्रद्धाहीन हो और कुटिल बुद्धि वाला हो, उसे इस गौदान का उपदेश नहीं देना चाहिए; क्योंकि यह परम गोपनीय धर्म है; अतः इसका सर्वत्र उपदेश नहीं करना चाहिए॥ 22॥ | | | | One should not preach this ritual of donating cows to a person who is not his disciple, who does not observe fasts, who lacks faith and whose mind is crooked; because this is the most secretive dharma; hence it should not be preached everywhere.॥ 22॥ | | ✨ ai-generated | | |
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