| श्री महाभारत » पर्व 13: अनुशासन पर्व » अध्याय 78: गोदानकी विधि, गौओंसे प्रार्थना, गौओंके निष्क्रय और गोदान करनेवाले नरेशोंके नाम » श्लोक 20 |
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| | | | श्लोक 13.78.20  | देवव्रती स्याद् वृषभप्रदाने
वेदावाप्तिर्गोयुगस्य प्रदाने।
तथा गवां विधिमासाद्य यज्वा
लोकानग्रॺान् विन्दते नाविधिज्ञ:॥ २०॥ | | | | | | अनुवाद | | ‘जो मनुष्य बैल का दान करता है, वह ब्रह्मचारी (सूर्यमण्डल का भेदन करने वाला ब्रह्मचारी) हो जाता है। जो गौ और बैल का दान करता है, वह वेदों को प्राप्त करता है और जो विधिपूर्वक गौदान यज्ञ करता है, वह उत्तम लोकों को प्राप्त करता है, किन्तु जो विधि को नहीं जानता, वह उत्तम फल को प्राप्त नहीं करता।॥ 20॥ | | | | ‘The man who donates a bull becomes a celibate (celibate who penetrates the solar system). The one who donates a cow and a bull attains the Vedas, and the one who performs the cow donation sacrifice according to the prescribed method attains the best worlds, but the one who does not know the method does not get the best result.॥ 20॥ | | ✨ ai-generated | | |
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