श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 78: गोदानकी विधि, गौओंसे प्रार्थना, गौओंके निष्क्रय और गोदान करनेवाले नरेशोंके नाम  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  13.78.2 
भीष्म उवाच
न गोदानात् परं किंचिद् विद्यते वसुधाधिप।
गौर्हि न्यायागता दत्ता सद्यस्तारयते कुलम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले- हे पृथ्वीराज! गौदान से बढ़कर कोई पुण्य नहीं है। यदि उचित रीति से प्राप्त गाय का दान किया जाए, तो वह तुरन्त ही सम्पूर्ण कुल का उद्धार कर देती है।
 
Bhishma said- Lord of the Earth! There is nothing better than the donation of a cow. If a cow obtained fairly is donated, it immediately uplifts the entire family.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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