श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 78: गोदानकी विधि, गौओंसे प्रार्थना, गौओंके निष्क्रय और गोदान करनेवाले नरेशोंके नाम  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  13.78.1 
युधिष्ठिर उवाच
विधिं गवां परं श्रोतुमिच्छामि नृप तत्त्वत:।
येन तान् शाश्वताँल्लोकानर्थिनां प्राप्नुयादिह॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले - नरेश्वर ! अब मैं गोदान की यथार्थ विधि सुनना चाहता हूँ; जिससे साधकों को अभीष्ट सनातन लोकों की प्राप्ति होती है ॥1॥
 
Yudhishthir said – Nareshwar! Now I want to hear the exact method of Godan; Due to which the aspirants attain the desired eternal worlds. 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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