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mahabharat 13.76.11: भीष्मजी कहते हैं- भरतश्रेष्ठ युधिष्ठिर! ब्रह्मा जी ने इन्द्र को यह उपरोक्त उपदेश दिया। इन्द्र ने इसे राजा दशरथ को दे दिया और पिता दशरथ ने इसे अपने पुत्र श्री रामचन्द्रजी को दे दिया। 11।   |   mahabharat अध्याय 13.76: दूसरोंकी गायको चुराकर देने या बेचनेसे दोष, गोहत्याके भयंकर परिणाम तथा गोदान एवं सुवर्ण-दक्षिणाका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 76: दूसरोंकी गायको चुराकर देने या बेचनेसे दोष, गोहत्याके भयंकर परिणाम तथा गोदान एवं सुवर्ण-दक्षिणाका माहात्म्य  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  13.76.11 
भीष्म उवाच
एतत् पितामहेनोक्तमिन्द्राय भरतर्षभ।
इन्द्रो दशरथायाह रामायाह पिता तथा॥ ११॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं- भरतश्रेष्ठ युधिष्ठिर! ब्रह्मा जी ने इन्द्र को यह उपरोक्त उपदेश दिया। इन्द्र ने इसे राजा दशरथ को दे दिया और पिता दशरथ ने इसे अपने पुत्र श्री रामचन्द्रजी को दे दिया। 11।
 
Bhishmaji says – Bharatshreshtha Yudhishthir! Lord Brahma gave this above advice to Indra. Indra gave it to King Dasharatha and father Dasharatha gave it to his son Shri Ramchandraji. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)