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mahabharat 13.75.9: गोलोक सभी प्राणियों के लिए सुन्दर है। वहाँ प्रत्येक वस्तु पर सबका समान अधिकार है। इसके समान विशाल कोई दूसरा लोक नहीं है॥9॥   |   mahabharat अध्याय 13.75: ब्रह्माजीका इन्द्रसे गोलोक और गोदानकी महिमा बताना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 75: ब्रह्माजीका इन्द्रसे गोलोक और गोदानकी महिमा बताना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  13.75.9 
मनोज्ञं सर्वभूतेभ्य: सर्वतन्त्रं प्रदृश्यत।
ईदृशाद् विपुलाल्लोकान्नास्ति लोकस्तथाविध:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
गोलोक सभी प्राणियों के लिए सुन्दर है। वहाँ प्रत्येक वस्तु पर सबका समान अधिकार है। इसके समान विशाल कोई दूसरा लोक नहीं है॥9॥
 
Golok is beautiful for all living beings. Everybody has equal rights over every object there. There is no other world as vast as this.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)