Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.75.29: उपर्युक्त मनुष्य भी राजसूय यज्ञ करने और बहुत सा सोना दक्षिणा देने से प्राप्त होने वाले फल के समान ही पुण्यफल प्राप्त करता है। ऐसा सभी सिद्ध-संत-महात्माओं और ऋषियों का कथन है॥29॥ | mahabharat अध्याय 13.75: ब्रह्माजीका इन्द्रसे गोलोक और गोदानकी महिमा बताना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यत् स्यादिष्ट्वा राजसूये फलं तु
यत् स्यादिष्ट्वा बहुना काञ्चनेन।
एतत् तुल्यं फलमप्याहुरग्रॺं
सर्वे सन्तस्त्वृषयो ये च सिद्धा:॥ २९॥
अनुवाद
उपर्युक्त मनुष्य भी राजसूय यज्ञ करने और बहुत सा सोना दक्षिणा देने से प्राप्त होने वाले फल के समान ही पुण्यफल प्राप्त करता है। ऐसा सभी सिद्ध-संत-महात्माओं और ऋषियों का कथन है॥29॥
The man mentioned above also gets the same good result as that obtained by performing the Rajasuya Yagna and by offering a lot of gold as Dakshina. This is the statement of all the Siddha-Saints-Mahatmas and Rishis.॥ 29॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥