श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 75: ब्रह्माजीका इन्द्रसे गोलोक और गोदानकी महिमा बताना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  13.75.2 
सन्ति नानाविधा लोका यांस्त्वं शक्र न पश्यसि।
पश्यामि यानहं लोकानेकपत्न्यश्च या: स्त्रिय:॥ २॥
 
 
अनुवाद
हे शंकर! अनेक प्रकार के लोक हैं, जिन्हें आप देख नहीं सकते। मैं उन लोकों को देखता हूँ और पतिव्रता स्त्रियाँ भी उन्हें देख सकती हैं॥ 2॥
 
O Shankara! There are many types of worlds which you cannot see. I see those worlds and women who are faithful to their husbands can also see them.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)