श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 72: ब्राह्मणके धनका अपहरण करनेसे होने वाली हानिके विषयमें दृष्टान्तके रूपमें राजा नृगका उपाख्यान  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  13.72.29 
अनुज्ञात: स कृष्णेन नमस्कृत्य जनार्दनम्।
दिव्यमास्थाय पन्थानं ययौ दिवमरिंदम:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
भगवान् श्रीकृष्ण ने उसे अनुमति दे दी और शत्रुराज उन्हें प्रणाम करके दिव्य मार्ग का आश्रय लेकर स्वर्ग को चला गया॥29॥
 
Lord Shri Krishna gave him permission and the enemy king bowed to him and took shelter on the divine path and went to heaven. 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)