शतेन शतसंख्येन गवां विनिमयेन वै।
याचे प्रतिग्रहीतारं स तु मामब्रवीदिदम्॥ १४॥
देशकालोपसम्पन्ना दोग्ध्री शान्तातिवत्सला।
स्वादुक्षीरप्रदा धन्या मम नित्यं निवेशने॥ १५॥
अनुवाद
तब मैंने दान स्वीकार कर रहे उस ब्राह्मण से विनम्रतापूर्वक कहा, 'मैं इस गाय के बदले आपको दस हज़ार गायें दे रहा हूँ (आप उनकी गाय उन्हें लौटा दीजिए)।' यह सुनकर वह बोला, 'महाराज! यह गाय समय और स्थान के अनुकूल है, भरपूर दूध देती है, सरल है और अत्यंत दयालु स्वभाव की है। इसका दूध बहुत मीठा है। यह मेरे घर आई, यह सौभाग्य की बात है। यह सदैव मेरे पास रहेगी।'
‘Then I humbly told the Brahmin who was accepting donations, ‘I am giving you ten thousand cows in exchange for this cow (you return their cow to them).’ On hearing this, he said, ‘Maharaj! This cow is suitable for the time and place, gives full milk, is simple and has a very kind nature. It gives very sweet milk. It is fortunate that it came to my house. It will always stay with me.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥