श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 71: गोदानकी महिमा तथा गौओं और ब्राह्मणोंकी रक्षासे पुण्यकी प्राप्ति  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  13.71.17 
यश्चैव धर्मं कुरुते तस्य धर्मफलं च यत्।
सर्वस्यैवांशभाग् दाता तं निमित्तं प्रवृत्तय:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य गौदान लेकर धर्म का पालन करता है, वह अपने धर्म के फल में भागी होता है, क्योंकि उसी कारण से उसमें गौदान की प्रवृत्ति हुई थी॥17॥
 
One who performs religious duties by accepting cow donation, becomes a sharer in whatever result of his religious duties, because for that very reason he had the inclination to donate cows.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)