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mahabharat 13.70.6-7h: उस ब्राह्मणों के गाँव में जाओ और वहाँ अगस्त्य वंश के एक विद्वान, अनावृत और शम का अभ्यास करने वाले शर्मि नामक ब्राह्मण को ले आओ।॥6 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 13.70: तिल, जल, दीप तथा रत्न आदिके दानका माहात्म्य—धर्मराज और ब्राह्मणका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.70.6-7h 
गच्छ त्वं ब्राह्मणग्रामं ततो गत्वा तमानय।
अगस्त्यं गोत्रतश्चापि नामतश्चापि शर्मिणम्॥ ६॥
शमे निविष्टं विद्वांसमध्यापकमनावृतम्।
 
 
अनुवाद
उस ब्राह्मणों के गाँव में जाओ और वहाँ अगस्त्य वंश के एक विद्वान, अनावृत और शम का अभ्यास करने वाले शर्मि नामक ब्राह्मण को ले आओ।॥6 1/2॥
 
Go to that village of the Brahmins and bring here a learned teacher Brahmin named Sharmi, belonging to the group of Agastya, who is unveilsed and who practices Shama.॥ 6 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)