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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 70: तिल, जल, दीप तथा रत्न आदिके दानका माहात्म्य—धर्मराज और ब्राह्मणका संवाद
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श्लोक 32
श्लोक
13.70.32
वाससां सम्प्रदानेन स्वदारनिरतो नर:।
सुवस्त्रश्च सुवेषश्च भवतीत्यनुशुुश्रुम॥ ३२॥
अनुवाद
हमने सुना है कि जो पुरुष अपनी स्त्री के प्रति स्नेहवश वस्त्र दान करता है, उसे सुन्दर वस्त्र और सुन्दर वेश-भूषा प्राप्त होती है ॥ 32॥
We have heard that a man who, out of affection for his own wife, donates clothes will be blessed with beautiful clothes and lovely attire. ॥ 32॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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