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mahabharat 13.70.17: द्विजश्रेष्ठ! यथाशक्ति तिल का दान अवश्य करना चाहिए। प्रतिदिन दान करने से तिल दानकर्ता की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं। 17॥   |   mahabharat अध्याय 13.70: तिल, जल, दीप तथा रत्न आदिके दानका माहात्म्य—धर्मराज और ब्राह्मणका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 70: तिल, जल, दीप तथा रत्न आदिके दानका माहात्म्य—धर्मराज और ब्राह्मणका संवाद  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  13.70.17 
तिलाश्च सम्प्रदातव्या यथाशक्ति द्विजर्षभ।
नित्यदानात् सर्वकामांस्तिला निर्वर्तयन्त्युत॥ १७॥
 
 
अनुवाद
द्विजश्रेष्ठ! यथाशक्ति तिल का दान अवश्य करना चाहिए। प्रतिदिन दान करने से तिल दानकर्ता की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं। 17॥
 
Dwijshreshtha! One must donate sesame seeds as per one's capacity. By donating daily, sesame seeds fulfill all the wishes of the donor. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)