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mahabharat 13.69.12-13: महाराज! ग्रहों के अधिपति भगवान सोम आदिकाल से ही प्रकट हुए हैं। प्रजानाथ! अमृत, सुधा, स्वाहा, स्वधा, अन्न, औषधि, तृण और लताएँ भी जल से उत्पन्न हुई हैं, जिनसे समस्त प्राणियों का जीवन प्रकट और पुष्ट होता है। 12-13॥   |   mahabharat अध्याय 13.69: अन्न और जलके दानकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 69: अन्न और जलके दानकी महिमा  »  श्लोक 12-13
 
 
श्लोक  13.69.12-13 
नीरजातश्च भगवान‍् सोमो ग्रहगणेश्वर:।
अमृतं च सुधा चैव स्वाहा चैव स्वधा तथा॥ १२॥
अन्नौषध्यो महाराज वीरुधश्च जलोद्भवा:।
यत: प्राणभृतां प्राणा: सम्भवन्ति विशाम्पते॥ १३॥
 
 
अनुवाद
महाराज! ग्रहों के अधिपति भगवान सोम आदिकाल से ही प्रकट हुए हैं। प्रजानाथ! अमृत, सुधा, स्वाहा, स्वधा, अन्न, औषधि, तृण और लताएँ भी जल से उत्पन्न हुई हैं, जिनसे समस्त प्राणियों का जीवन प्रकट और पुष्ट होता है। 12-13॥
 
Maharaj! Lord Som, the ruler of the planets, has appeared from the very beginning. Prajanath! Amrit, Sudha, Swaha, Swadha, food, medicine, grass and creepers have also arisen from water, from which the life of all living beings appears and is strengthened. 12-13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)