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mahabharat 13.69.11: हे कुरुश्रेष्ठ! इसलिए हमने सुना है कि जो लोग अपने प्राणों का त्याग करते हैं, वे उत्तम गति को प्राप्त होते हैं। परंतु अन्न भी जल से उत्पन्न होता है। जल से उत्पन्न अन्न के बिना कोई भी कार्य नहीं हो सकता। ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 13.69: अन्न और जलके दानकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 69: अन्न और जलके दानकी महिमा  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  13.69.11 
तस्माद् विशिष्टां गच्छन्ति प्राणदा इति न:श्रुतम्।
अन्नं वापि प्रभवति पानीयात् कुरुसत्तम।
नीरजातेन हि विना न किंचित् सम्प्रवर्तते॥ ११॥
 
 
अनुवाद
हे कुरुश्रेष्ठ! इसलिए हमने सुना है कि जो लोग अपने प्राणों का त्याग करते हैं, वे उत्तम गति को प्राप्त होते हैं। परंतु अन्न भी जल से उत्पन्न होता है। जल से उत्पन्न अन्न के बिना कोई भी कार्य नहीं हो सकता। ॥11॥
 
O best of the Kurus! Therefore, we have heard that those who sacrifice their lives attain the best of destinations. But food grains are also produced from water. Nothing can be done without the grains produced from water. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)